राज्यपाल ने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश का किया आह्वान..
हिमवंती मीडिया राज्यपाल एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल प्रदान करना बल्कि उनमें चरित्र, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना का भी विकास करना चाहिए। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर बल देते हुए कहा कि यह एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का आधार बनेगा।
राज्यपाल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को शुभकामनाएं दीं और वर्ष 1970 में स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, गुणवत्तापूर्ण शोध तथा एनएएसी द्वारा ‘ए’ ग्रेड मान्यता की सराहना करते हुए कहा कि यह अवसर उत्सव के साथ-साथ आत्ममंथन का भी है।
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने विश्वविद्यालय से आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में अनुसंधान को और सशक्त बनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से एक-एक गांव गोद लेने और वहां शिक्षा के प्रसार, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक विकास के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा कर्मचारियों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक एवं शोधकर्ता पुरस्कार तथा सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही डीआरडीओ की दो प्रमुख शोध परियोजनाओं के लिए 82 लाख रुपये और 87 लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के दृष्टिगत कई नए अंतरविषयक केंद्र तथा कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे.
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