हिमवंती मीडिया/मिस्सरवाला
अखिल भारतीय समाज सुधार समिति के अध्यक्ष मौलाना कबीरुद्दीन फ़ारान ने भारत सरकार के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पासपोर्ट बनवाने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में पत्र लिख कर कहा है कि पासपोर्ट प्रत्येक भारतीय नागरिक का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और भारतीय होने की एक प्रमुख पहचान है, लेकिन लोगों को इसे बनवाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्हें कई अनावश्यक दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं। जबकि केवल आधार कार्ड में ही सभी आवश्यक जानकारी होती है, इसका होना ही पर्याप्त माना जाना चाहिए। पत्र में मौलाना फारान ने यह भी कहा कि छोटे-मोटे मामलों में एफआईआर दर्ज होने के कारण आवेदक को पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में अदालती और अन्य चरणों के कारण काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।
छोटे-मोटे मामलों में, एफ.आई. पंजीकरण के मामले में, आवेदक को पासपोर्ट प्राप्त करने में असाधारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जिला न्यायालय मुश्किल से दो साल के लिए पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देता है, और वह भी लंबे इंतज़ार के बाद दूसरी तारीख को। दूसरे चरण में, आवेदक को अदालत में ज़मानती भी देनी होती है। इसके बाद, पूरी फ़ाइल आगे की प्रक्रिया के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भेज दी जाती है, जो एक बेहद जटिल, धैर्यपूर्ण और कष्टदायक प्रक्रिया है। जबकि, देश-विरोधी गतिविधियों या हत्या जैसे गंभीर मामलों की एफआईआर के मामले में ही अदालत की अनुमति अनिवार्य होनी चाहिए। इस पत्र में सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए, प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार टोपी, पगड़ी या हिजाब पहनकर पासपोर्ट बनवाने की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।उन्हों ने यह भी माँग की है कि प्रत्येक ज़िले के उपायुक्त को भी पासपोर्ट बनाने का अधिकार दिया जाए।
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