हिमवंती मीडिया/शिमला
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री ने कहा कि वोकेशनल शिक्षक सरकारी कर्मचारी की परिभाषा में नहीं आते, अतः नियमितीकरण का प्रश्न ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यह एक तकनीकी उत्तर है, परंतु वास्तविकता यह है कि प्रदेश भर में पिछले 9-10 वर्षों से कार्यरत वोकेशनल शिक्षक सरकारी स्कूलों में कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। वोकेशनल शिक्षकों का कहना है कि वे भी उतनी ही जिम्मेदारी निभा रहे हैं जितनी अन्य अध्यापक उन पर विभागीय नियम, समय सारणी और अनुशासन लागू होता है।
परीक्षा परिणाम सुधारने और छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा देने में उनका सीधा योगदान है। ऐसे में उनका यह कहना है कि “नियमितीकरण का प्रश्न ही नहीं उठता” कहीं न कहीं उनके योगदान को कम आंकने जैसा है। शिक्षकों ने विनम्र आग्रह किया है कि सरकार और शिक्षा मंत्री इस विषय पर पुनर्विचार करें और चरणबद्ध तरीके से वोकेशनल शिक्षकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करने की ठोस नीति बनाए। अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी उन्हें समान अवसर और स्थायित्व दिया जाए। वोकेशनल शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार और मंत्री से किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते, बल्कि सहयोगी बनकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनके धैर्य और समर्पण को समझेगी और जल्द ही सकारात्मक कदम उठाएगी।
