हिमवंती मीडिया/राजगढ़

श्री ब्राह्मण सभा की राजगढ़ इकाई के सौजन्य से रविवार को शिरगुल देवता के मंदिर परिसर में भगवान परशुराम की जंयती धूमधाम से मनाई गई । इस मौके पर भगवान परशुराम, माता श्रीरेणुकाजी और जमदग्नि ऋषि के चित्र पर लोगों ने फूलमालाएं अर्पित की गई तथा मंदिर परिसर में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया । इस मौके पर लोगों में प्रसाद वितरित किया गया। श्री ब्राह्मण सभा की राजगढ़ इकाई के अध्यक्ष हरदेव भारद्वाज ने लोगों को परंशुराम जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास की शुक्ल तृतीया के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इनके पिता महर्षि जगदग्नि ने पुत्र प्राप्ति के लिए महायज्ञ किया था जिससे प्रसन्न होकर देवराज इन्द्र ने महर्षि जगदग्नि एवं श्री रेणुका का तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया था। भगवान परशुराम को एक महान योद्धा के रूप में जाना जाता है। परशुराम ने 21बार पृथ्वी को क्षेत्रियों से रहित किया था।

उन्होने बताया कि भगवान परशुराम शास्त्र व शस्त्र विद्या के पूर्ण ज्ञाता थे। प्राणी मात्र का हित उनका सर्वोपरि हित था । उन्होने कहा कि भगवान परशुराम तेजस्वी, ओजस्वी, वर्चस्वी महापुरूष थे, न्याय के पक्षधर होने होने के कारण भगवान परशुराम बाल अवस्था से ही अन्याय का निरन्तर विरोध करते रहे। उन्होने कहा कि भगवान परशुराम दीन-दुखियों, शोषित और पीड़ित वर्ग की सदैव सहायता एवं रक्षा करते रहे। इस मौके पर ब्राह्मण सभा ईकाई के पदाधिकारी विजय भारद्वाज, रविदत्त भारद्वाज, अमित शर्मा, सुभाष शर्मा, सतीश ठाकुर, विकल्प सिंह ठाकुर, रतन हाब्बी, अरूण वशिष्ठ, वेदप्रकाश शर्मा, दिनेश शर्मा, अनिल शर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।