हिमवंती मीडिया/पांवटा साहिब 

हिमाचल प्रदेश में बिजली निजीकरण के खिलाफ हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। पांवटा में भी हड़ताल तेज हो गई है, जहां बिजली बोर्ड के निजीकरण और स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी और पेंशनर्स ने इस प्रदर्शन में भाग लिया। इस दौरान संघ के अध्यक्ष इम्तिहान हाशमी ने कहा कि सरकार जरूर उनकी समस्या का समाधान करेगी और निजीकरण से बिजली दरें बढ़ेंगी, सब्सिडी खत्म होगी और सस्ती दरों पर बिजली मिलना बंद हो जाएगी। केंद्र सरकार लगातार राज्य सरकारों पर बिजली कंपनियों के निजीकरण हेतु दबाव बना रही है इसी क्रम में विद्युत अधिनियम में अनेक संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली क्षेत्र युवाओं के रोजगार का एक बड़ा स्रोत है निजीकरण से रोजगार के अवसरों में भारी गिरावट आएगी वर्तमान में बोर्ड के कुल राजस्व का लगभग 64% औद्योगिक उपभोक्ताओं से प्राप्त होगा यदि यह वर्ग निजी कंपनियों के पास चला जाता है तो सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित होगी जिसका सीधा असर कर्मचारियों की सेवा शर्तों पेंशन भुगतान एवं भविष्य की सुरक्षा पर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को 15 से 20 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ सकती है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपने की साजिश कर रही है, जिससे कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। उन्होंने बताया कि बिजली बोर्ड का निजीकरण बेहद घातक होगा और इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि 12 फरवरी को प्रदेशभर में हड़ताल का ऐलान किया गया है, जिसमें बिजली बोर्ड कर्मचारी, इंजीनियर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निजी क्षेत्र की यूनियनें और आउटसोर्स अस्पताल कर्मचारी भाग ले रहे।