हिमवंती मीडिया/सिरमौर(रवीना)

हिमाचल प्रदेश के गिरिपार क्षेत्र की प्रीतिका नंबरदार शंखवन की पहचान ‘मुड़ेरे वाली दीदी’ के रूप में होती है। हालाँकि, ये शुरुआत है, लेकिन ऐसा अनोखा हो रहा है कि प्रीति हिल डिश ‘मूड’ को नेशनल दिलवाने में पहचान दिलाना संभव हो सकता है। असल में, नाहन के चौगान मैदान में सिरमौर क्रिकेट कप का आयोजन हो रहा है। यहां कॉर्नर पर एक स्टॉल में प्रीति हिल मुड़ा बेच रही है। प्रीतिका ने हिल मूडे को एक ब्रांड बनाने का हठ इसलिए भी दिया, क्योंकि जब उन्होंने जीरो पर स्वयं सहायता समूह के समसामयिक मूडे की बात की थी तो उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें निरुत्सहित कर दिया था। दिलचस्प बात यह है कि प्रीति चाहती है कि काजू-बादाम की जगह मुड़ा मस्जिद के सामने से होकर जाना चाहिए। मार्किट में एक दिलचस्प दिलचस्प लड़की वाली प्रीती का नाहन में मूडा ड्रामा का प्रयोग सबसे पहले है।

प्रीति एक पढ़ी-लिखी शिक्षित महिला है, जो स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनने की चाहत रखती है। एम-बीएड प्रीति कोइस कार्य में अन्य शिक्षक पति का सहयोग मिला। उन्होंने उसे हर कदम पर प्रेरणा दी। प्रीति अपने पति और सिरमौर क्रिकेट कप के खिलाड़ियों की दुकानें हैं, उन्हें माफ़ी स्टॉल उपलब्ध कराया गया है। प्रीति नंबरदार की कहानी सिर्फ एक स्टॉल की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि अगर हम विश्वास पर विश्वास करते हैं, तो अपनी पहचान और रोजगार का मजबूत आधार बन सकते हैं। ‘मूड़े वाली बहन’ आज साबित कर रही हैं कि दोस्त, जिद और मेहनत से पहाड़ की रसोई का स्वाद भी राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है।