हिमवंती मीडिया/नाहन (मन्नत गर्ग)

डॉक्टर का पेशा केवल निर्धारित ड्यूटी समय तक सीमित नहीं होता, बल्कि जरूरत के समय मरीज के साथ खड़ा रहना ही चिकित्सा सेवा की असली भावना है। नाहन मेडिकल कॉलेज के जनरल मेडिसिन विभाग की डॉ. अनिकेता शर्मा अपने कार्य और व्यवहार से इसी सेवा भावना की मिसाल पेश कर रही हैं। डॉ. अनिकेता शर्मा की ड्यूटी ओपीडी में शाम 4 बजे तक रहती है, लेकिन मरीजों की जरूरत को देखते हुए वह कई बार इसके बाद भी घंटों बैठकर मरीजों को देखती हैं। हाल ही में वह रात करीब 9 बजे तक, यानी निर्धारित ओपीडी समय के लगभग पांच घंटे बाद तक, मरीजों की जांच करती रहीं। खासतौर पर दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों से इलाज के लिए पहुंचे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उन्होंने बिना देखे वापस नहीं लौटाया। मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद एक-एक मरीज की समस्या सुनकर उन्हें चिकित्सकीय सलाह देना उनके समर्पण को दर्शाता है। दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए दोबारा अस्पताल पहुंचना कई बार कठिन होता है, ऐसे में उन्हें उसी दिन चिकित्सकीय परामर्श मिलना बड़ी राहत बन जाता है। डॉ. अनिकेता शर्मा का मरीजों के प्रति यह सेवा भाव कोई एक दिन की बात नहीं है। इससे पहले भी वह निर्धारित ओपीडी समय के बाद मरीजों की मदद करती रही हैं। उनके मानवीय व्यवहार का एक और उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब सड़क पर राह चलते उन्हें एक बुजुर्ग महिला मिलीं। बताया जाता है कि महिला को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी थी। उस समय ओपीडी का समय नहीं था, बावजूद इसके डॉ.अनिकेता ने उनकी समस्या को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने महिला की परेशानी समझी, उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी और प्रिस्क्रिप्शन लिखकर दवाइयों के संबंध में मार्गदर्शन किया। साथ ही महिला को अगले दिन ओपीडी में आने की सलाह दी, ताकि उनकी समस्या की उचित जांच और आगे का उपचार किया जा सके।

यह घटना बताती है कि उनके लिए मरीज और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद केवल अस्पताल की चारदीवारी या ड्यूटी के घंटों तक सीमित नहीं है। जहां संभव हो, वह अपने चिकित्सकीय ज्ञान और अनुभव से लोगों की सहायता करने का प्रयास करती हैं। आज जब अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या और चिकित्सकों पर काम का दबाव लगातार चर्चा का विषय है, ऐसे में डॉ. अनिकेता शर्मा का अतिरिक्त समय देकर मरीजों को देखना चिकित्सा पेशे के मानवीय पक्ष को सामने लाता है। ड्यूटी का समय खत्म हो सकता है, लेकिन इंसानियत की कोई टाइमिंग नहीं होती। डॉ. अनिकेता शर्मा का यह समर्पण न केवल मरीजों के लिए राहत और भरोसे का कारण बन रहा है, बल्कि अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है। नाहन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा सेवा के इस मानवीय प्रयास को निश्चित रूप से सराहना मिलनी चाहिए। गारैरतलब है चिकित्सा के क्षेत्र में उनके समर्पण, मरीजों के प्रति सेवाभाव को देखते हुए डॉ. अनिकेता शर्मा को ‘स्व. इंजीनियर पंडित राम शर्मा स्मारक हिमोत्कर्ष राष्ट्रीय एकात्मकता पुरस्कार’ से भी नवाजा गया है वहीं 2019 में इन्हें ‘हिमाचल प्रदेश सिरमौर कला संगम’ द्वारा भी डॉ. परमार पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा चुका।