हिमवंती मीडिया/पांवटा साहिब
वर्तमान वर्ष का ठुंडू समुदाय/बिरादरी का मिलन समारोह हामल परगना/क्षेत्र के ठुंडणा गांव में संपन्न हुआ। जिसमें बिरादरी के सभी प्रबुद्ध जनों के साथ-साथ युवाओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। हिमाचल प्रदेश के शिमला, सिरमौर व उत्तराखंड के लगभग 100 गांवों के 2000 ठुंडूओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सर्वप्रथम हामल क्षेत्र के ठुंडूओं और ठुंडणियों ने बाहर के क्षेत्र से यहां आये ठुंडूओं का ढोल नगाड़ों, फूलमालाओं एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ स्वागत एवं अभिनंदन किया। सनंद रहे की ठुंडू विकास समिति के बेनर तले लगभग हर वर्ष ठुंडू बिरादरी का मिलन एवं मेलजोल समारोह आयोजित किया जाता है। जिसमें हर खंड के 2-3 गांव को मिलाकर बनी 20-22 इकाईयों ने भाग लिया। बिरादरी के ऐसे आयोजन से पारस्परिक एकता व भ्रातृभाव के साथ-साथ आपसी मेलजोल तथा जान पहचान को बल मिलता है। उक्त कार्यक्रम में क्षेत्र के संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। बता दे कि ठंडू बिरादरी हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी खैल अर्थात बिरादरी है। जिसे हम सरल भाषा में यह कह सकते है यह समस्त समुदाय इतिहास में आदिकाल से एक मां और बाप की संताने है। जिनका विस्तार और जनसंख्या आज सैकड़ों गांव व हजारों की संख्या में है।
पहाड़ी क्षेत्र में इन ठुंडू खौश (राजपूत) समुदाय का बहुत बड़ा प्रभाव है। पूर्व में इस समुदाय के पूर्वजों को स्थानीय लोग अपनी रक्षा के लिए अपने गांव में बसाते थे। क्योंकि यह ठुंडू समुदाय आदिकाल से ही बड़े बहादुर और वीरता में कुशल समुदाय माना गया है। ठुंडूओं की बहादुरी को देखकर राजा जुब्बल ने स्वयं ठुंडूओं को “श्रेष्ठ ठाकुर” की उपाधी से सुशोभित किया। यह ठुंडू समुदाय सबसे शांत, कुशल, न्यायप्रिय और सर्वजनहिताय, सर्वजन सुखाय बातों पर विश्वास रखने वाला समुदाय है। इतिहास से ही इस समुदाय का घनिष्ठ संबंध क्षेत्र के अलग अलग बिरादरान जैसे शुणकुटा, खदराई, देवा, शुआइक, खशाण, पुंबा जैसे कई अन्य बिरादरी से रहा है। ठुंडू बिरादरी का आदिकाल से धर्म के साथ-साथ सभी जातियों, उंच-नीच, अमीर-गरीब, बहादुर -कमजोर से गहरा जुड़ाव रहा है। ठुंडू समुदाय का मुख्य व्यवसाय बागवानी, कृषि एवं पशुपालन है। इस समुदाय का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। इस क्षेत्र का गौरव बढ़ाने में इस समुदाय की अहम भूमिका है। ठुंडू समुदाय के लोग विभिन्न क्षेत्रों में गांव, जिला, प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं और यह सभी के लिए फक्र की बात है। ठुंडू बिरादरी का ऐसा आयोजन अद्भुत व गोरवान्वित करने वाला क्षण रहता है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ये हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रौत व क्षण है। संगठन के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सभी ठुंडूओं को संगठित और भाईचारे के साथ समाज की कुरितियों को दूर करने और समाज एवं मानव हित में हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए।
इस बैठक में ठुंडू बिरादरी से जुड़ी समस्याओं तथा निवारण पर चर्चा हुई। उसके बाद सामाजिक, आर्थिक और राजनितिक क्षेत्र में समुदाय कैसे आगे बढ़ें इसपर विशेष चिंतन मंथन हुआ। समुदाय के हर क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले ठुंडूओं को सम्मानित किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि डॉक्टर (प्रो०) मोहन ठुंडू, पूर्व निदेशक हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग, पूर्व रजिस्ट्रार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा विशेष अतिथि नंबरदार बलबीर ठुंडू रहे। कुल देवी माता के भंडारी, जेलदार, समस्त नंबरदार तथा समस्त कार्यकारिणी को मंच पर विशेष स्थान दिया गया। ज्ञात रहे कि ठुंडू बिरादरी से संबंध रखने वाली ठुन्टी विरांगना महासति सुरमी देवी जिनका हारुल और वीरगाथाओं में विशेष वर्णन है। जिन्होने महासति होने का निर्णय लिया। जिसमें स्वयं बिरादरी के ईष्टदेव बिजट महाराज प्रकट हुए और महासति सुरमी देवी को धर्म की बहन बनाकर मुखाग्नि देकर उन्हें अमरत्व प्रदान किया। ऐसी वीरांगनाओं से प्रेरित होकर ठुंडू बिरादरी की बहनों (ठुंटियों) ने समस्त गांव से 2-3 की संख्या में उपस्थिति दी। ठुंटियों ने अपने भाइयों के समक्ष अपने इष्टदेव बिजट महाराज जी के मूल स्थान सराहां में भंडारे और समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। जिसे सभी ने त्वरित स्वीकार किया। उसके उपरांत इष्टदेव बिजट महारज से आज्ञा और समारोह के क्रियान्वयन का जिम्मा समस्त नंबरदारों और संगठन की कार्यकारिणी को दिया गया। जिसके लिए भविष्य में हर गांव के लिए सूचना जारी की जाएगी। इस समारोह का शुभारंभ ठुंडू विकास समिति के अध्यक्ष धर्मेन्द्र ठुंडू के स्वागत भाषण और समापन संगठन के महासचिव दिनेश ठुंडू के धन्यवाद अभिभाषक के साथ-साथ भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।
