हिमवंती मीडिया/शिमला
करीब 15 साल के एक लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश के मुखिया को अपने बीच पाकर सिर्फ कांगड़ा जिला ही नहीं बल्कि प्रदेश के सबसे दुर्गम और कठिन क्षेत्र बड़ा भंगाल के लोग खुशी से चहक उठे। खासकर उन युवाओं की खुशी का ठिकाना नहीं था जिन्होंने बचपन की दहलीज को अभी-अभी लांघा है और पहली बार किसी मुख्यमंत्री को देखने का सपना पूरा हुआ।
लगभग डेढ़ दशक के बाद कोई मुख्यमंत्री न सिर्फ बड़ा भंगाल क्षेत्र के दौरे पर पहुंचा बल्कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पूरी रात स्थानीय लोगों के साथ बिताकर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया। यह पहली बार नहीं जब श्री सुक्खू ने दुर्गम क्षेत्र में पहुंचकर लोगों का दुःख-दर्द साझा किया है। ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम की नई सोच के साथ वह लगातार ऐसे कठिन क्षेत्रों में रात्रि ठहराव करते आए हैं जहां आमतौर पर कोई नेता पहुंचने में रुचि नहीं दिखाता है। इससे पहले उन्होंने शिमला ज़िले के डोडरा-क्वार और कुपवी, कुल्लू ज़िले के बागा सराहन सहित जनजातीय जिलों लाहौल-स्पिति और किन्नौर के दूरस्थ गांवों का दौरा कर वहां के लोगों के बीच रात्रि प्रवास कर उनकी समस्याओं और परेशानियों का समाधान किया है।
मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बड़ा भंगाल के क्षेत्र के लोगों में उत्सवी माहौल है। स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है कि वर्ष 2011 के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल का दौरा कर उनकी सुध ली है। क्षेत्र में पहली बार किसी मुख्यमंत्री के रात्रि ठहराव से स्थानीय लोग बहुत उत्साहित हैं और उन्होंने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं और प्रशासन को दिए गए निर्देशों से बड़ा भंगाल क्षेत्र के विकास को नया आयाम मिलेगा। बड़ा भंगाल के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में रंगे नजर आए। उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा ‘चोला-डोरा’ धारण कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक लोकनृत्य में भी सहभागिता की।
लागू की है। इसके तहत प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा पांगी घाटी में उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त, हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जबकि अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।
