हिमवंती मीडिया/शिमला
भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा सचिव एवं पार्षद कमलेश मेहता ने नगर निगम शिमला के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस शासित नगर निगम द्वारा प्रस्तुत ₹688 करोड़ का बजट वास्तविकता से परे और जनता को भ्रमित करने वाला है। उन्होंने कहा कि जब नगर निगम की वास्तविक आय लगभग ₹143 करोड़ बताई जा रही है, तब इतने बड़े बजट का दावा करना केवल आंकड़ों का खेल है, जो “ढाक के तीन पात” जैसी स्थिति दर्शाता है। कमलेश मेहता ने कहा कि यह भी बेहद गंभीर विषय है कि नगर निगम के महापौर स्वयं अपने पद पर असंवैधानिक स्थिति में बताए जा रहे हैं, और ऐसे में कहा जा सकता है कि कथित महापौर द्वारा प्रस्तुत बजट की वैधता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए पद की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बजट में संपत्ति कर और पानी शुल्क बढ़ाने जैसे निर्णय सीधे आम नागरिकों की जेब पर असर डालेंगे। कांग्रेस की नीति “जनता से वसूली और उसी को विकास बताने” वाली प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि 14 खेल मैदान, 17 पार्किंग और 25 नई सड़कों जैसी घोषणाएँ आकर्षक जरूर हैं, लेकिन इनके लिए स्पष्ट वित्तीय स्रोत और समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव है। बिना ठोस आधार के ऐसी घोषणाएँ केवल “हवा महल” साबित होती हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम को केंद्र सरकार से लगभग ₹57 करोड़ का अनुदान मिलने की बात स्वयं बजट दस्तावेज़ों में कही गई है, जिससे साफ है कि निगम अपनी आय से विकास करने में सक्षम नहीं है और बाहरी सहायता पर निर्भर है। यह नगर निगम की वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर दिखाता है। कमलेश मेहता ने यह भी कहा कि पहली बार बजट बिना विपक्ष की पूर्ण भागीदारी के पेश किया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। “चर्चा से बचना और बजट थोपना यह दर्शाता है कि सरकार खुद अपने आंकड़ों पर भरोसा नहीं कर पा रही,” उन्होंने कहा। अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के हितों से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी और नगर निगम के इस अव्यावहारिक बजट की सच्चाई शहरवासियों के सामने रखती रहेगी। उन्होंने कहा कि शिमला की जनता को दिखावटी घोषणाएँ नहीं, बल्कि ठोस विकास चाहिए और भाजपा इसी उद्देश्य के साथ संघर्ष करती रहेगी।
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