हिमवंती मीडिया/शिमला
देवभूमि हिमाचल ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि यह प्रदेश देश का सबसे समृद्ध और पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्यों में से एक है। पिछले दो दशकों में प्रदेश के वन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि भारतीय वन विज्ञानी (एफ असोसिएट) की द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का कुल वन क्षेत्र वर्ष 2003 में 14,353 वर्ग किमी से अधिक वर्ष 2023 में 15,580.4 वर्ग किमी हो गया। इस प्रदेश का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 25.73 प्रतिशत से अधिक 28 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार प्रदेश का वृक्ष क्षेत्रफल 2003 में 491 वर्ग किमी से घनत्व 2023 में 855.07 वर्ग किमी हो गया है, जो कुल क्षेत्रफल के 0.88 प्रतिशत से घनत्व 1.53 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह वर्तमान प्रदेश सरकार के सतत वनीकरण, पर्यावरण पुनर्स्थापना और जनसहभागिता आधारित वन प्रबंधन के सफल प्रयास का परिणाम है। प्रदेश की ये है अहम जिम्मेदारी, सरकार की अलग-अलग मंसूबियां और स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता सोसायटी और वन एसोसिएशन की सक्रियता से भागीदारी संभव है। मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला मंडलों, युवा मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य पंजीकृत पंजीकृत आवेदकों की भागीदारी से वनीकरण अभियानों को नई गति मिली है। प्रत्येक संगठन को पांच हेक्टेयर तक के बंजर या क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र को विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस पर प्रति अधिकतम 1.20 लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाएगी। एक हेक्टेयर से छोटे क्षेत्र के लिए राशि निर्धारित अनुपात के तहत जारी की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रमाणित जीवित रहने की दर के आधार पर प्रति हेक्टेयर 1.20 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार में वनस्पति घनत्व और जैव विविधता में वृद्धि हुई है। संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) और नई भागीदारी आधारित वन पुनर्स्थापन योजना के तहत लोगों को वनों के स्वामित्व और निवेश से औद्योगिक लाभ मिलता है, जिससे पारिस्थितिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। प्रदेश के ये वन महत्वपूर्ण जलागम क्षेत्रों का निर्माण करते हैं, जो उत्तरी भारत की प्रमुख नदियों को जल प्रदान करते हैं, कृषि जलाशयों का निर्माण करते हैं, स्थानीय जलवायु को नियंत्रित करते हैं और प्रकृति से संबंधित सांस्कृतिक और आध्यात्म को भी मजबूत बनाते हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की यह उपलब्धि नीति-निष्ठा, वैज्ञानिक वन प्रबंधन और जनसहभागिता का प्रमाण है जिससे मध्यम संतुलन और आर्थिक लाभ दोनों प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के जलवायु अनुकूल पैटर्न, समग्र भू-प्रबंधन और जनसंख्या विविधता संरक्षण पर विशाल ध्यान प्रदेश के भारत के पेरिस क्षेत्र और ग्रीन इंडिया मिशन के तहत राष्ट्रीय आँकड़े जारी किए गए हैं।
