प्रदेश में प्रवेश करने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स में की गई भारी बढ़ोतरी के फैसले पर भी नेता प्रतिपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे बिना सोचे-समझे लिया गया एक अदूरदर्शी निर्णय करार दिया है, जिसके जवाब में अब पड़ोसी राज्य पंजाब भी हिमाचल के वाहनों पर टैक्स थोपने की तैयारी कर रहा है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर हिमाचल के आम नागरिकों पर पड़ेगा जो दैनिक कार्यों, शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पंजाब और दिल्ली की ओर रुख करते हैं।
जयराम ठाकुर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस टैक्स को लागू करते समय राज्य के उन सीमावर्ती जिलों ऊना, कांगड़ा, चंबा, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर के लोगों की भावनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है जिनकी पंजाब और हरियाणा में आपस में रिश्तेदारियां हैं। हर दिन का आना जाना है। उन्हें बार-बार एंट्री टैक्स का आर्थिक बोझ सहना पड़ेगा। पूर्व में जब हमें प्रदेश की सेवा का मौका मिला था तो हमारी सरकार ने पहले ही फैसले में अपने ही प्रदेश में आने पर एंट्री फीस देने के कानून का खात्मा किया था। सुक्खू सरकार की संवेदनहीनता की वजह से आज हालात बदल गए हैं। सुक्खू सरकार करों के माध्यम से राजस्व जुटाने की कोशिश में प्रदेश वासियों के साथ अन्याय कर रही है। इसका हिमाचल के महत्वपूर्ण पर्यटन कारोबार पर भी अत्यंत विपरीत प्रभाव पड़ेगा क्योंकि पड़ोसी राज्यों से आने वाले पर्यटक भारी टैक्स के डर से अन्य राज्यों का रुख कर सकते हैं, जिससे प्रदेश की आर्थिकी को लंबी अवधि में भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को अपने इस जनविरोधी निर्णय पर पुनः विचार करना चाहिए।
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