रांची के गोइलकेरा में ‘भागवंत‍ि देवी छात्रावास’ का डॉ. राजीव बिंदल ने किया लोकार्पण

हिमवंती मीडिया/शिमला 
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने झारखंड के रांची जिले के गोइलकेरा में 200 विद्यार्थियों के ‘भागवंत‍ि देवी छात्रावास’ के लोकार्पण के अवसर पर उपस्थित होकर गहरा भावनात्मक अनुभव व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह क्षण उनके जीवन के सबसे गौरवपूर्ण और संतोषदायक पलों में से एक है, क्योंकि इस छात्रावास का नाम उनकी पूज्य माताजी स्वर्गीय श्रीमती भागवंत‍ि देवी जी के नाम पर रखा गया है। डॉ. बिंदल ने कहा कि इस अवसर पर उपस्थित होना उनके लिए केवल एक कार्यक्रम में भाग लेना नहीं, बल्कि चार दशक पुरानी स्मृतियों को पुनः जीने जैसा अनुभव है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी की वीरभूमि को वे सादर नमन करते हैं, क्योंकि यही वह पवित्र भूमि है जहाँ उन्हें लगभग 40 वर्ष पूर्व वनवासी समाज के बीच सेवा कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने इस क्षेत्र में चिकित्सा सेवा और कल्याण आश्रम के अन्य सेवा प्रकल्पों के माध्यम से वनवासी समाज के बीच कार्य प्रारंभ किया था। कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और अपरिचित परिवेश के बावजूद वनवासी समाज के बीच रहकर सेवा करने का अवसर उनके जीवन का अमूल्य अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि आज उसी भूमि पर 200 बच्चों के लिए छात्रावास का निर्माण होना उनके लिए अत्यंत भावुक और संतोष देने वाला क्षण है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह छात्रावास केवल एक भवन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और समाज के प्रति दायित्व की भावना का जीवंत प्रतीक है। यहां रहने वाले वनवासी बच्चे शिक्षा के माध्यम से अपने जीवन को संवारेंगे और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के संस्थापक बाबा साहेब देशपांडे जी को नमन करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और संकल्प से देशभर में वनवासी समाज के उत्थान के लिए अनेक सेवा प्रकल्प प्रारंभ हुए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूजनीय माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’ को श्रद्धापूर्वक वंदन किया, जिनकी प्रेरणा से वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना हुई और सेवा कार्यों का यह व्यापक अभियान शुरू हुआ। डॉ. बिंदल ने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके मन में अपने पूज्य पिताजी और माताजी की स्मृतियाँ विशेष रूप से ताजा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता के संस्कारों और आशीर्वाद ने ही उन्हें सेवा और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अंत में अपने पूज्य पिताजी और माताजी के श्रीचरणों में कोटिशः नमन करते हुए कहा कि समाज सेवा का यह भाव ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और आगे भी इसी भावना के साथ राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करते रहना उनका संकल्प है।

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