हिमवंती मीडिया/राजगढ़
आखिर शैलेन्द्र हितैषी की दिन रात की मेहनत रंग लाई और इन्होने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट ) पहले ही प्रयास में उतीर्ण करके समूची पझौता घाटी का नाम रोशन किया है। शैलेन्द्र ने बताया कि उन्होने नेट परीक्षा के लिए कोई कोचिंग नहीं ली बल्कि अपने स्तर पर ही घर पर परीक्षा की तैयारी की। इनकी इस उपलब्धि से समूची पझौता घाटी में खुशी की लहर है। बता दें कि शैलेन्द्र हितैषी मूलतः राजगढ़ उप मंडल की पझौता घाटी के गांव मानवा के रहने वाले हैं। इन्होने आठवी तक की शिक्षा अपने पैतृक गांव मानवा से ग्रहण की। तदोपरांत इन्होने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं तथा बीए की उपाधि भी राजगढ़ डिग्री कॉलेज से हासिल की।
शैलेन्द्र को संगीत का शौक बचपन से ही था जिसकी दीक्षा इन्हे घुटटी में अपनी माता मीरा हितैषी से मिली जोकि आकाशवाणी से भी अनुमोदित पहाड़ी कलाकार रही है। इनके पिता सुखदेव हितैषी एक किसान है। कॉलेज में भी इन्होने म्यूजिक विषय को अनिवार्य रूप से रखा और बीए उतीर्ण करने के उपरांत अब शैलेन्द्र हिमाचल विश्वविद्यालय से संगीत में एमए कर रहे हैं। इन्होंने संगीत में अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता परिवार अलावा विशेषकर राजगढ़ कॉलेज की संगीत की प्रोफेसर डॉ0 सविता सहगल नीरजा सहगल को दिया है। इन्होने बताया कि उनका सपना संगीत में सहायक प्रोफेसर बनना है जिसके लिए उन्होने नेट परीक्षा पास करने के लिए दिनरात मेहनत की है। इन्होने बताया कि उनका लक्ष्य संगीत में पीएचडी करना है ताकि सिरमौर की प्राचीन संस्कृति तथा पारंपरिक लोकगीतों का संरक्षण कर सके।
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