हिमवंती मीडिया/शिमला
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर की ‘बिजली मित्र’ पहल पर अप्रासंगिक टिप्पणी करने के लिए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पूर्व भाजपा सरकार ने ही सबसे पहले ‘कृषि मित्रों’ के रूप में ऐसी नियुक्तियां आरम्भ की थीं। उस समय की रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि ‘कृषि मित्रों’ ने अपने पूरे कार्यकाल में अनियमित और अपर्याप्त मानदेय के बारे में बार-बार चिंता व्यक्त की थी। राजेश धर्माणी ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने भी ‘पशु सखियों’ की नियुक्ति की थी, फिर भी आज जय राम ठाकुर ‘बिजली मित्रों’ पर आपत्ति कर रहे हैं, जिन्हें वर्तमान सरकार नियमित वेतन पर नियुक्त करेगी और उनके मानदेय में वार्षिक वृद्धि का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वह युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता को अग्निवीर नीति की भी याद दिलाई, जिसके तहत युवा केवल चार वर्ष सेवा करते हैं और फिर बिना किसी नौकरी की सुरक्षा या पेंशन लाभ के घर भेज दिए जाते हैं।
यह छोटा कार्यकाल उन्हें अपने भविष्य के बारे में अनिश्चित बना देता है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पूरे पांच वर्ष प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा, जल शक्ति और लोक निर्माण विभाग में मात्र 4,500 रुपये के मानदेय पर मल्टी टास्क वर्कर्स नियुक्त किए थे, जिनका मानदेय बाद में मुख्यमंत्री ठाकुर सिख्विंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने 1,000 रुपये बढ़ा दिया था। यह समझ से परे है कि विपक्ष में रहते हुए भी जय राम ठाकुर अपने उन फैसलों पर विचार नहीं करते जिनसे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ा है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में कर्मचारी चयन आयोग में नौकरियों की बिक्री हो रही थी, वहां व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार का बोलबाला था। राजेश धर्माणी ने कहा कि मेरा यह मानना है कि जय राम ठाकुर को मीडिया में अप्रासंगिक मुद्दे उठाने से पहले अपनी कमियों पर भी विचार करना चाहिए और प्रदेश हित में सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की खुले दिल से सराहना की जानी चाहिए।
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