हिमवंती मीडिया/शिमला
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मजबूत, समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही साकार किया जा सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान गतिविधियों को सामूहिक प्रतिबद्धता तथा संस्थागत नवाचार के माध्यम से निरंतर सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में आयोजित हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी कोर्ट 36वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।
इससे पूर्व, उन्होंने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित डिजिटल स्टूडियो/एमओओसी रिकॉर्डिंग स्टूडियो का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय दूरस्थ शिक्षा एवं मुक्त अधिगम केंद्र के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने इस स्टूडियो के महत्व के बारे में जानकारी दी। यह स्टुडियो गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा को अधिक लोगों तक पहुंचाने में सहायक साबित होगा। गुप्ता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की सेवा कर रहा है। तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश के अनुरूप विश्वविद्यालय को शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता में निरंतर सुधार की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा केवल तकनीकी और व्यावसायिक विषयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि उसमें नैतिक मूल्यों, सदाचार और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने के लिए सार्थक प्रयास करने का आह्वान किया। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। विधायक सुरेश कुमार को सर्वसम्मति से कार्यकारी परिषद का सदस्य चुना गया। विधायक हरीश जनारथा, सुरेश कुमार तथा चंद्र शेखर ने अपने महत्त्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। रजिस्ट्रार ज्योति राणा ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इस अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।
