हिमवंती मीडिया/शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में हो रही भर्ती से अभिभावकों में नाराजगी देखी गई है। जुन्गा क्षेत्र के अनेक अभिभावकों सीमा देवी, सुनील कुमार, दानवीर शर्मा, दौलत राम, ओम प्रकाश, रीता देवी, वंदना देवी, आकाश वाला एवं रमेश चंद सहित अनेक अभिभावको ने बताया कि सुक्खु सरकार ने 130 सरकारी स्कूलों को सीबीएससी बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है परंतु जिस प्रकार शिक्षकों की नियुक्ति में विलंब हो रहा है वह सबधिंत स्कूलों के भविष्य के उचित नहीं है।

अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट लेकर एक माह पहले परिणाम भी घोषित किया गया है परंतु शिक्षकों की नियुक्ति में सरकार ने कोई प्रभावशाली कदम नहीं उठाए हैं जिससे अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। गौर रहे कि काफी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को प्राईवेट स्कूलों से हटा कर सरकारी सीबीएसई स्कूलों में दाखिला दिलवाया है।  अभिभावकों को उम्मीद थी कि अब उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में भी उच्च स्तर की शिक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल मिलेगा। अभिभावकों का कहना है कि जब सरकार ने स्वयं यह घोषणा की थी कि सीबीएसई स्कूलों में केवल योग्य और दक्ष शिक्षक ही नियुक्त किए जाएंगे, तो फिर इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है और बच्चों का भविष्य किसी प्रशासनिक देरी का शिकार नहीं बनना चाहिए। अनेक अभिभावकों ने बताया कि अगर सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की समय पर नियुक्ति समय पर नहीं होती है तो उन्हे अपने बच्चों को दुबारा प्राईवेट स्कूलों में दाखिला दिलवाना पड़ेगा।

दूसरी ओर स्क्रींनिग टेस्ट में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले शिक्षक सीबीएसई स्कूलों में नई नियुक्ति का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। शिक्षक वर्ग का यह भी कहना है कि सीबीएसई स्कूलों में मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जाए। राजनैतिक दबाव व भाई भतीजावाद की प्रक्रिया को शिक्षकों की नियुक्ति में आड़े नहीं आने दिया जाना चाहिए। अभिभावकों सरकार से मांग करते हुए कहा है कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की मेरिट आधारित नियुक्ति प्रक्रिया को बिना किसी और देरी के शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और अभिभावकों का विश्वास बना रहे। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर तुरंत निर्णय लेकर बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।