हिमवंती मीडिया/सहारनपुर
शनिवार भारतीय नेत्रहीन विद्यालय में एक प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां भोले-भाले और मासूम दृष्टिबाधित बच्चों को बांसुरी वादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह, लगन और आत्मविश्वास के साथ संगीत की मधुर धुनों को सीखने का प्रयास किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारना और उन्हें आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास की नई दिशा देना रहा।
बांसुरी की मधुर धुनों के बीच बच्चों के चेहरे पर खुशी और सीखने का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था। विद्यालय प्रबंधन एवं प्रशिक्षकों ने बताया कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मबल बढ़ाने और मानसिक ऊर्जा प्रदान करने का भी सशक्त जरिया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इन बच्चों का उत्साह यह साबित करता है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो कोई भी बाधा सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकती। इस प्रेरणादायक पहल की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
