हिमवंती मीडिया/शिमला

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने एक पत्र में लिखा है कि केंद्र की प्रमुख लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 150वीं जयंती के अवसर पर जिला पद के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल को एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल को उनके सहयोग से इस समिति के सदस्य के रूप में प्रदेश सचिव तिलक राज, सचिव अमित ठाकुर और युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सनी डॉ. डॉ. डॉ. इस मौके पर बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी आम जनता के दो एपी.साइकिल कार्ड के मुद्दे पर तो जोरदार बयानबाजी करते हैं, लेकिन अपनी ही कोर टीम की नेतागिरी पर मौन साध लेते हैं। हिमाचल में भी वोटो को लेकर कांग्रेस द्वारा ऐसी एक जिज्ञासा चल रही है, और कांग्रेस की ये आस्था सच्चाई से परे है।

बिंदल ने आगे कहा कि जो कांग्रेस पार्टी खुद को मोहब्ब्त की दुकान चलाती है, असल में वही फर्जीवाड़े और फरेब का बाजार है। कांग्रेस के सीडब्ल्यूसी और सदस्य मीडिया प्रमुख पवन अभ्यर्थियों के पास दो-दो ईपीआईसी कार्ड मिले। अब उनकी पत्नी कोटा नीलिमा, 2023 में तेलंगाना की 60-खैरताबाद विधानसभा सीट से जो प्रतियोगी रहीं, उनके पास भी दो-दो ईपी.आईसीटीक कार्ड मिले हैं। बिंदल ने बताया कि 2023 के शपथपत्र और मतदाता सूची में नाम कोटाईमा नील, पति का नाम पवन अनुबंध, एपी.आईसीटी नंबर TDZ2666014, विधानसभा 60-खैरताबाद, भाग संख्या 214, और क्रमांक 314 दर्ज है। यह ईपी. कार्ड 2025 भी सक्रिय मिला, लेकिन इसमें पार्ट नंबर 204 और सीरियल नंबर 752 कर दिया गया। लेकिन खेल का अंत नहीं हुआ – एक और एपी.आईसीटी कार्ड सामने आया है, जो इस बार दिल्ली से आया है। इस कार्ड में नाम कोटा नीलिमा नहीं, बल्कि केवल के। नीलिमा दर्ज है। इस नए कार्ड का ईपी.आई.सी.टी.सी. नंबर SZE0755975 है, जो बिल्कुल अलग है। यह विधानसभा 40-नई दिल्ली, पार्ट नंबर 70, और सीरियल नंबर 821 से संबंधित है।

 

बिहारी लाल ने कहा कि रिंक चक्र पवन के संयोजक और उनके परिवार का हो या बिहार में युवा यादव का-जिन्होनें अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद दो-दो एपीसिस्टिकल कार्ड सामने आने पर भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी- ये कांग्रेस की पुरानी कहानी है। उन्होंने याद किया कि 1980 में सोनिया गांधी, इटली के नागरिक होने के बावजूद, मतदाता सूची में शामिल हो गए थे। यानी वे भारतीय नागरिक बाद में बने, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम सबसे पहले ही दर्ज किया गया था। वोट चोरी का आरोप वाली कांग्रेस पार्टी असल में वोट चोरी का आरोप लगा रही है। कश्मीर और बिहार में नासिक से पहले किस तरह के चुनाव में धांधली होती थी, यह पूरे देश का पता है।