हिमवंती मीडिया/शिमला
हिमाचल प्रदेश में चिट्टे और नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ सरकार ने अपना अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि चिट्टे के खिलाफ प्रदेश सरकार की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। युवाओं और बच्चों को नशे से बचाने के साथ-साथ नशा तस्करी से अर्जित संपत्ति पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया कि सरकार बनने के बाद युवाओं और बच्चों को चिट्टे से बचाने के उद्देश्य से शिमला से वॉकथॉन की शुरुआत की गई थी। अब इस अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आगामी 7 सितंबर को ऊना में वॉकथॉन आयोजित किया जाएगा और इसके बाद मंडी में भी वॉकथॉन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य और युवा पीढ़ी को बचाने का अभियान है।
इसी उद्देश्य से सरकार जनभागीदारी के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। सरकार ने चिट्टे के अवैध कारोबार से अर्जित धन से बनाई गई संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अवैध चिट्टा कारोबार से कमाए गए पैसे से निर्मित संपत्तियों को ध्वस्त किया जा रहा है। इसके अलावा कई मामलों में PIT-NDPS Act के तहत भी कार्रवाई की गई है इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल नशे के कारोबार में शामिल व्यक्तियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे के अवैध नेटवर्क की आर्थिक नींव को कमजोर करना भी है। अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर कार्रवाई के जरिए सरकार तस्करों को कड़ा संदेश दे रही है कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति को सुरक्षित नहीं रहने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को चिट्टे से बचाने की बात कही। सरकार का प्रयास है कि नशे के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता पैदा की जाए। वॉकथॉन जैसे अभियानों के माध्यम से युवाओं, अभिभावकों और आम जनता को नशे के खिलाफ एकजुट करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का संदेश स्पष्ट है—हिमाचल की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए जागरूकता से लेकर सख्त कानूनी कार्रवाई तक हर स्तर पर लड़ाई जारी रहेगी।
