हिमवंती मीडिया/शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार को झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उपायुक्तों (DC) को दी गई आरक्षण से जुड़ी 5 प्रतिशत शक्तियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि पंचायत चुनाव में इस प्रकार की शक्तियां डीसी को देने का न तो कोई संवैधानिक प्रावधान है और न ही पंचायती राज अधिनियम में इसका उल्लेख है। ऐसे में सरकार द्वारा उपायुक्तों को यह अधिकार देना कानून के दायरे में नहीं आता।

गौरतलब है कि सोमवार को हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में उपायुक्तों द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर आरक्षण का रोस्टर जारी कर दिया गया था। लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थिति बदल गई है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी भी जिले में उपायुक्त ने इन शक्तियों का उपयोग करते हुए आरक्षण में बदलाव किया है, तो वहां 7 अप्रैल शाम 5:00 बजे तक नया (फ्रेश) रोस्टर जारी करना होगा। इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और जिलों में जारी रोस्टर की समीक्षा शुरू हो गई है। अब जहां-जहां नियमों के विपरीत बदलाव किए गए होंगे, वहां दोबारा रोस्टर जारी किया जाएगा।मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है। फिलहाल इस फैसले ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर बड़ा प्रभाव डाला है और सरकार को भी अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।